महाभारत 12.65.33
एवं प्रवर्तिते धर्मे पुरा सुचरितेऽनघकः क्षत्रमवमन्येत चेतनावान्बहुश्रुतः
evaṃ pravartite dharme purā sucarite'naghakaḥ kṣatramavamanyeta cetanāvānbahuśrutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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