महाभारत 12.69.36
क्षेत्रस्थेषु च सस्येषु शत्रोरुपजपेन्नरान्विनाशयेद्वा सर्वस्वं बलेनाथ स्वकेन वै
kṣetrastheṣu ca sasyeṣu śatrorupajapennarānvināśayedvā sarvasvaṃ balenātha svakena vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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