महाभारत 12.69.46
नक्तमेव च भक्तानि पाचयेत नराधिपःन दिवाग्निर्ज्वलेद्गेहे वर्जयित्वाग्निहोत्रिकम्
naktameva ca bhaktāni pācayeta narādhipaḥna divāgnirjvaledgehe varjayitvāgnihotrikam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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