महाभारत 12.7.14
उपवासैस्तथेज्याभिर्व्रतकौतुकमङ्गलैःलभन्ते मातरो गर्भांस्तान्मासान्दश बिभ्रति
upavāsaistathejyābhirvratakautukamaṅgalaiḥlabhante mātaro garbhāṃstānmāsāndaśa bibhrati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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