महाभारत 12.7.30
आत्मनो हि वयं दोषाद्विनष्टाः शाश्वतीः समाःप्रदहन्तो दिशः सर्वास्तेजसा भास्करा इव
ātmano hi vayaṃ doṣādvinaṣṭāḥ śāśvatīḥ samāḥpradahanto diśaḥ sarvāstejasā bhāskarā iva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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