महाभारत 12.7.37
न हि कृत्स्नतमो धर्मः शक्यः प्राप्तुमिति श्रुतिःपरिग्रहवता तन्मे प्रत्यक्षमरिसूदन
na hi kṛtsnatamo dharmaḥ śakyaḥ prāptumiti śrutiḥparigrahavatā tanme pratyakṣamarisūdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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