महाभारत 12.7.39
स परिग्रहमुत्सृज्य कृत्स्नं राज्यं तथैव चगमिष्यामि विनिर्मुक्तो विशोको विज्वरस्तथा
sa parigrahamutsṛjya kṛtsnaṃ rājyaṃ tathaiva cagamiṣyāmi vinirmukto viśoko vijvarastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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