महाभारत 12.72.31
एवं धर्मं प्रयत्नेन कौन्तेय परिपालयन्इह पुण्यफलं लब्ध्वा नाधिबन्धेन योक्ष्यसे
evaṃ dharmaṃ prayatnena kaunteya paripālayaniha puṇyaphalaṃ labdhvā nādhibandhena yokṣyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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