महाभारत 12.72.33
स राज्यमृद्धिमत्प्राप्य धर्मेण परिपालयन्इन्द्रं तर्पय सोमेन कामैश्च सुहृदो जनान्
sa rājyamṛddhimatprāpya dharmeṇa paripālayanindraṃ tarpaya somena kāmaiśca suhṛdo janān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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