महाभारत 12.75.16
ततोऽब्रवीद्वैश्रवणो राजानं सपुरोहितम्नाहं राज्यमनिर्दिष्टं कस्मैचिद्विदधाम्युत
tato'bravīdvaiśravaṇo rājānaṃ sapurohitamnāhaṃ rājyamanirdiṣṭaṃ kasmaicidvidadhāmyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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