महाभारत 12.79.5
सर्वास्ववस्थास्वेतानि ब्राह्मणः परिवर्जयेत्एतेषां विक्रयात्तात ब्राह्मणो नरकं व्रजेत्
sarvāsvavasthāsvetāni brāhmaṇaḥ parivarjayeteteṣāṃ vikrayāttāta brāhmaṇo narakaṃ vrajet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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