महाभारत 12.8.31
जित्वा ममत्वं ब्रुवते पुत्रा इव पितुर्धनेराजर्षयो जितस्वर्गा धर्मो ह्येषां निगद्यते
jitvā mamatvaṃ bruvate putrā iva piturdhanerājarṣayo jitasvargā dharmo hyeṣāṃ nigadyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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