महाभारत 12.83.26
तेभ्यः सर्वेभ्य एवाहुर्भयं राजोपसेविनाम्अथैषामेकतो राजन्मुहूर्तादेव भीर्भवेत्
tebhyaḥ sarvebhya evāhurbhayaṃ rājopasevināmathaiṣāmekato rājanmuhūrtādeva bhīrbhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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