महाभारत 12.83.2
ह्रियमाणममात्येन भृतो वा यदि वाभृतःयो राजकोशं नश्यन्तमाचक्षीत युधिष्ठिर
hriyamāṇamamātyena bhṛto vā yadi vābhṛtaḥyo rājakośaṃ naśyantamācakṣīta yudhiṣṭhira
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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