महाभारत 12.83.4
राजकोशस्य गोप्तारं राजकोशविलोपकाःसमेत्य सर्वे बाधन्ते स विनश्यत्यरक्षितः
rājakośasya goptāraṃ rājakośavilopakāḥsametya sarve bādhante sa vinaśyatyarakṣitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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