महाभारत 12.83.63
सर्वकामान्परित्यज्य तपस्तप्तं तदा मयास्नेहात्त्वां प्रब्रवीम्येतन्मा भूयो विभ्रमेदिति
sarvakāmānparityajya tapastaptaṃ tadā mayāsnehāttvāṃ prabravīmyetanmā bhūyo vibhramediti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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