महाभारत 12.83.8
अधीये वायसीं विद्यां शंसन्ति मम वायसाःअनागतमतीतं च यच्च संप्रति वर्तते
adhīye vāyasīṃ vidyāṃ śaṃsanti mama vāyasāḥanāgatamatītaṃ ca yacca saṃprati vartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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