महाभारत 12.84.39
ज्ञानविज्ञानसंपन्नः प्रकृतिज्ञः परात्मनोःसुहृदात्मसमो राज्ञः स मन्त्रं श्रोतुमर्हति
jñānavijñānasaṃpannaḥ prakṛtijñaḥ parātmanoḥsuhṛdātmasamo rājñaḥ sa mantraṃ śrotumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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