महाभारत 12.86.24
न परस्य श्रवादेव परेषां दण्डमर्पयेत्आगमानुगमं कृत्वा बध्नीयान्मोक्षयेत वा
na parasya śravādeva pareṣāṃ daṇḍamarpayetāgamānugamaṃ kṛtvā badhnīyānmokṣayeta vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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