महाभारत 12.87.31
तेषु सत्कारसंस्कारान्संविभागांश्च कारयेत्परराष्ट्राटवीस्थेषु यथा स्वविषये तथा
teṣu satkārasaṃskārānsaṃvibhāgāṃśca kārayetpararāṣṭrāṭavīstheṣu yathā svaviṣaye tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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