महाभारत 12.89.27
प्राज्ञः शूरो धनस्थश्च स्वामी धार्मिक एव चतपस्वी सत्यवादी च बुद्धिमांश्चाभिरक्षति
prājñaḥ śūro dhanasthaśca svāmī dhārmika eva catapasvī satyavādī ca buddhimāṃścābhirakṣati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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