महाभारत 12.91.34
अशीते विद्यते शीतं शीते शीतं न विद्यतेअवृष्टिरतिवृष्टिश्च व्याधिश्चाविशति प्रजाः
aśīte vidyate śītaṃ śīte śītaṃ na vidyateavṛṣṭirativṛṣṭiśca vyādhiścāviśati prajāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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