महाभारत 12.94.35
के मानुरक्ता राजानः के भयात्समुपाश्रिताःमध्यस्थदोषाः के चैषामिति नित्यं विचिन्तयेत्
ke mānuraktā rājānaḥ ke bhayātsamupāśritāḥmadhyasthadoṣāḥ ke caiṣāmiti nityaṃ vicintayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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