महाभारत 12.95.2
न चाप्यलब्धं लिप्सेत मूले नातिदृढे सतिन हि दुर्बलमूलस्य राज्ञो लाभो विधीयते
na cāpyalabdhaṃ lipseta mūle nātidṛḍhe satina hi durbalamūlasya rājño lābho vidhīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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