महाभारत 12.97.11
सहसा नाम्य भूतानि क्षिप्रमेव प्रसादयेत्सान्त्वेन भोगदानेन स राज्ञां परमो नयः
sahasā nāmya bhūtāni kṣiprameva prasādayetsāntvena bhogadānena sa rājñāṃ paramo nayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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