महाभारत 12.97.14
नामित्रो विनिकर्तव्यो नातिच्छेद्यः कथंचनजीवितं ह्यप्यतिच्छिन्नः संत्यजत्येकदा नरः
nāmitro vinikartavyo nāticchedyaḥ kathaṃcanajīvitaṃ hyapyaticchinnaḥ saṃtyajatyekadā naraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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