महाभारत 12.98.9
स सर्वयज्ञैरीजानो राजाथाभयदक्षिणैःअनुभूयेह भद्राणि प्राप्नोतीन्द्रसलोकताम्
sa sarvayajñairījāno rājāthābhayadakṣiṇaiḥanubhūyeha bhadrāṇi prāpnotīndrasalokatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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