महाभारत 12.99.26
ब्रह्मस्वे ह्रियमाणे यः प्रियां युद्धे तनुं त्यजेत्आत्मानं यूपमुच्छ्रित्य स यज्ञोऽनन्तदक्षिणः
brahmasve hriyamāṇe yaḥ priyāṃ yuddhe tanuṃ tyajetātmānaṃ yūpamucchritya sa yajño'nantadakṣiṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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