महाभारत 12.99.41
यस्तु सेनापतिं हत्वा तद्यानमधिरोहतिस विष्णुविक्रमक्रामी बृहस्पतिसमः क्रतुः
yastu senāpatiṃ hatvā tadyānamadhirohatisa viṣṇuvikramakrāmī bṛhaspatisamaḥ kratuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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