महाभारत 12.99.45वराप्सरःसहस्राणि शूरमायोधने हतम्त्वरमाणा हि धावन्ति मम भर्ता भवेदितिvarāpsaraḥsahasrāṇi śūramāyodhane hatamtvaramāṇā hi dhāvanti mama bhartā bhaveditiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें