महाभारत 13.1.32
किल्बिषी चापि मे वध्यः किल्बिषी चासि पन्नगआत्मानं कारणं ह्यत्र त्वमाख्यासि भुजंगम
kilbiṣī cāpi me vadhyaḥ kilbiṣī cāsi pannagaātmānaṃ kāraṇaṃ hyatra tvamākhyāsi bhujaṃgama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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