महाभारत 13.1.58
मृत्युरुवाचविवशौ कालवशगावावां तद्दिष्टकारिणौनावां दोषेण गन्तव्यौ यदि सम्यक्प्रपश्यसि
mṛtyuruvācavivaśau kālavaśagāvāvāṃ taddiṣṭakāriṇaunāvāṃ doṣeṇa gantavyau yadi samyakprapaśyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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