महाभारत 13.1.75
न तु त्वया कृतं पार्थ नापि दुर्योधनेन वैकालेन तत्कृतं विद्धि विहता येन पार्थिवाः
na tu tvayā kṛtaṃ pārtha nāpi duryodhanena vaikālena tatkṛtaṃ viddhi vihatā yena pārthivāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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