महाभारत 13.10.33
एवं तौ तत्र संभूतावुभौ शूद्रमुनी तदाक्रमेण वर्धितौ चापि विद्यासु कुशलावुभौ
evaṃ tau tatra saṃbhūtāvubhau śūdramunī tadākrameṇa vardhitau cāpi vidyāsu kuśalāvubhau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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