महाभारत 13.10.46
भाव्यं हि कारणेनात्र न ते हास्यमकारणम्कौतूहलं मे सुभृशं तत्त्वेन कथयस्व मे
bhāvyaṃ hi kāraṇenātra na te hāsyamakāraṇamkautūhalaṃ me subhṛśaṃ tattvena kathayasva me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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