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महाभारत 13.100.15
यदा श्राद्धं पितृभ्यश्च दातुमिच्छेत मानवःतदा पश्चात्प्रकुर्वीत निवृत्ते श्राद्धकर्मणि
yadā śrāddhaṃ pitṛbhyaśca dātumiccheta mānavaḥtadā paścātprakurvīta nivṛtte śrāddhakarmaṇi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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