महाभारत 13.102.13अथ पर्यायश ऋषीन्वाहनायोपचक्रमेपर्यायश्चाप्यगस्त्यस्य समपद्यत भारतatha paryāyaśa ṛṣīnvāhanāyopacakrameparyāyaścāpyagastyasya samapadyata bhārataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें