महाभारत 13.102.24
अद्येन्द्रं स्थापयिष्यामि पश्यतस्ते शतक्रतुम्संचाल्य पापकर्माणमिन्द्रस्थानात्सुदुर्मतिम्
adyendraṃ sthāpayiṣyāmi paśyataste śatakratumsaṃcālya pāpakarmāṇamindrasthānātsudurmatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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