महाभारत 13.107.125
अयोनिं च वियोनिं च न गच्छेत विचक्षणःपिङ्गलां कुष्ठिनीं नारीं न त्वमावोढुमर्हसि
ayoniṃ ca viyoniṃ ca na gaccheta vicakṣaṇaḥpiṅgalāṃ kuṣṭhinīṃ nārīṃ na tvamāvoḍhumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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