महाभारत 13.107.50
पन्था देयो ब्राह्मणाय गोभ्यो राजभ्य एव चवृद्धाय भारतप्ताय गर्भिण्यै दुर्बलाय च
panthā deyo brāhmaṇāya gobhyo rājabhya eva cavṛddhāya bhārataptāya garbhiṇyai durbalāya ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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