महाभारत 13.110.75
तत्र देवाधिदेवस्य कुमार्यो रमयन्ति तम्द्वात्रिंशद्रूपधारिण्यो मधुराः समलंकृताः
tatra devādhidevasya kumāryo ramayanti tamdvātriṃśadrūpadhāriṇyo madhurāḥ samalaṃkṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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