महाभारत 13.112.32
बृहस्पतिरुवाचजीवो धर्मसमायुक्तः शीघ्रं रेतस्त्वमागतःस्त्रीणां पुष्पं समासाद्य सूते कालेन भारत
bṛhaspatiruvācajīvo dharmasamāyuktaḥ śīghraṃ retastvamāgataḥstrīṇāṃ puṣpaṃ samāsādya sūte kālena bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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