महाभारत 13.112.48
श्वयोनौ तु स संभूतस्त्रीणि वर्षाणि जीवतितत्रापि निधनं प्राप्तः कृमियोनौ प्रजायते
śvayonau tu sa saṃbhūtastrīṇi varṣāṇi jīvatitatrāpi nidhanaṃ prāptaḥ kṛmiyonau prajāyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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