महाभारत 13.113.11
यस्य ह्यन्नमुपाश्नन्ति ब्राह्मणानां शता दशहृष्टेन मनसा दत्तं न स तिर्यग्गतिर्भवेत्
yasya hyannamupāśnanti brāhmaṇānāṃ śatā daśahṛṣṭena manasā dattaṃ na sa tiryaggatirbhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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