महाभारत 13.113.23
अन्नस्य हि प्रदानेन नरो दुर्गं न सेवतेतस्मादन्नं प्रदातव्यमन्यायपरिवर्जितम्
annasya hi pradānena naro durgaṃ na sevatetasmādannaṃ pradātavyamanyāyaparivarjitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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