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महाभारत 13.115.7
कर्मणा लिप्यते जन्तुर्वाचा च मनसैव च
karmaṇā lipyate janturvācā ca manasaiva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंकर्मणा लिप्यते जन्तुर्वाचा च मनसैव च
karmaṇā lipyate janturvācā ca manasaiva ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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