महाभारत 13.115.9
मनोवाचि तथास्वादे दोषा ह्येषु प्रतिष्ठिताःन भक्षयन्त्यतो मांसं तपोयुक्ता मनीषिणः
manovāci tathāsvāde doṣā hyeṣu pratiṣṭhitāḥna bhakṣayantyato māṃsaṃ tapoyuktā manīṣiṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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