महाभारत 13.116.39
अखादन्ननुमोदंश्च भावदोषेण मानवःयोऽनुमन्येत हन्तव्यं सोऽपि दोषेण लिप्यते
akhādannanumodaṃśca bhāvadoṣeṇa mānavaḥyo'numanyeta hantavyaṃ so'pi doṣeṇa lipyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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