महाभारत 13.116.44
खादकस्य कृते जन्तुं यो हन्यात्पुरुषाधमःमहादोषकरस्तत्र खादको न तु घातकः
khādakasya kṛte jantuṃ yo hanyātpuruṣādhamaḥmahādoṣakarastatra khādako na tu ghātakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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