महाभारत 13.118.5
निरता येन भावेन तत्र मे शृणु कारणम्सम्यक्चायमनुप्रश्नस्त्वयोक्तश्च युधिष्ठिर
niratā yena bhāvena tatra me śṛṇu kāraṇamsamyakcāyamanupraśnastvayoktaśca yudhiṣṭhira
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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